Vishwakarma Puja 2025 बुधवार 17 सितंबर को मनाई जाएगी। यह दिन कारीगरों, इंजीनियरों और कलाकारों के लिए खास महत्व रखता है। जानें विश्वकर्मा पूजा की तिथि, विधि, महत्व, अनुष्ठान और देशभर में इसकी परंपरा। साथ ही पढ़ें दिल्ली में होने वाले श्री विश्वकर्मा मेला 2025 (17–21 सितंबर) की पूरी जानकारी – कार्यक्रम, सांस्कृतिक उत्सव, कला, तकनीक और सम्मान समारोह।
विश्वकर्मा पूजा 2025 कब है?
विश्वकर्मा पूजा हर साल भगवान विश्वकर्मा के सम्मान में मनाई जाती है, जिन्हें सृष्टि का दिव्य शिल्पी माना जाता है। साल 2025 में यह पूजा बुधवार, 17 सितंबर 2025 को होगी। यह दिन कन्या संक्रांति पर पड़ रहा है, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है। यही कारण है कि यह दिन खास और शुभ माना जाता है।
भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
भगवान विश्वकर्मा को पहला इंजीनियर और शिल्पकार कहा जाता है। पुराणों के अनुसार उन्होंने द्वारका और इन्द्रप्रस्थ जैसे नगर बनाए। उन्होंने पुष्पक विमान और दिव्य अस्त्र जैसे त्रिशूल और सुदर्शन चक्र की रचना भी की। यही कारण है कि कारीगर, इंजीनियर, तकनीशियन और कलाकार उन्हें अपना आराध्य मानते हैं।
विश्वकर्मा पूजा के मुख्य अनुष्ठान
इस दिन फैक्ट्री, ऑफिस और वर्कशॉप में विशेष पूजा होती है। सबसे पहले मशीनों और औज़ारों की सफाई कर सजावट की जाती है। भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर फल, मिठाई, नारियल, अगरबत्ती और दीपक से पूजा की जाती है। खास बात यह है कि इस दिन मशीनों और औज़ारों का उपयोग नहीं किया जाता।
भारत में पूजा का महत्व
पूर्वी भारत जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में यह पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है। वहीं दक्षिण भारत में कारीगर और इंजीनियर कार्यस्थल पर विशेष पूजा करते हैं। उत्तर भारत के गैराज, वर्कशॉप और स्कूलों में सुबह पूजा आयोजित होती है। आजकल कॉर्पोरेट कंपनियां भी इस दिन अपने ऑफिस में उत्सव करती हैं।
पूजा का महत्व क्यों है?
विश्वकर्मा पूजा श्रम की गरिमा और कौशल का सम्मान करने का दिन है। यह हमें औज़ारों और मशीनों के सुरक्षित प्रयोग की शिक्षा देता है। व्यवसाय और उद्योग में समृद्धि व विकास की कामना की जाती है। यह पर्व कर्मचारियों में एकता बढ़ाता है और बच्चों को शिल्पकला व परंपरा की अहमियत सिखाता है।
यह भी पढ़े…
Karva Chauth 2025: कब है करवा चौथ? जानें शुभ मुहूर्त और योग
घर और ऑफिस में पूजा कैसे करें?
अगर आपके पास फैक्ट्री नहीं है तो भी आप इसे घर या ऑफिस में मना सकते हैं। भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर दीपक जलाएं। अपने लैपटॉप, कैमरा या औज़ारों पर हल्दी-कुमकुम लगाकर सजाएं। परिवार या सहकर्मियों के साथ आरती करें और इस दिन औज़ारों का उपयोग न करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
दिल्ली में विश्वकर्मा पूजा मेला 2025
दिल्ली में इस साल 17 से 21 सितंबर 2025 तक श्री विश्वकर्मा इंटरनेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा भव्य मेला आयोजित होगा। इसमें भक्ति, कला, शिल्प, तकनीक और संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। हजारों श्रद्धालु, कारीगर और संस्कृति प्रेमी इस आयोजन में शामिल होंगे। यह मेला पांच दिन तक चलेगा और रोज़ अलग थीम पर कार्यक्रम होंगे।
मेले का पहला दिन – 17 सितंबर 2025
मेले की शुरुआत उद्घाटन समारोह और हवन से होगी। इसके बाद भंडारा और शोभायात्रा निकाली जाएगी जिसमें भगवान विश्वकर्मा की रचनाओं की झांकी दिखाई जाएगी। शाम को भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दिन की थीम होगी – “शिल्प का दिव्य उद्गम”, जो भगवान विश्वकर्मा की विरासत को दर्शाएगी।
मेले का दूसरा दिन – कला और संस्कृति
18 सितंबर को मेले में शिल्प मेला आयोजित होगा। लकड़ी नक्काशी, धातु कला और मिट्टी के बर्तन बनाने की कार्यशालाएं होंगी। बच्चों के लिए ड्रेस और क्राफ्ट प्रतियोगिता होगी। शाम को लोकनृत्य, गायन और रामलीला का मंचन होगा। इस दिन की थीम होगी – “भारत की शिल्प और संस्कृति”।
मेले का तीसरा दिन – नवाचार और तकनीक
19 सितंबर को युवाओं और तकनीक को समर्पित किया जाएगा। बढ़ईगीरी, वेल्डिंग और मॉडल बनाने की प्रतियोगिता होगी। स्टार्टअप्स और युवा इनोवेशन प्रदर्शनी लगाई जाएगी। छात्र बहस और क्विज़ में भाग लेंगे। शाम को इंजीनियर और कारीगर प्रेरक भाषण देंगे। इस दिन की थीम होगी – “परंपरा से नवाचार तक”।
मेले का चौथा दिन – स्वास्थ्य और परंपरा
20 सितंबर को सुबह योग और प्राणायाम से शुरुआत होगी। आयुर्वेदिक जांच और हर्बल उत्पादों की प्रदर्शनी लगेगी। पारंपरिक व्यंजन बनाने की प्रतियोगिता और महिला समूहों के भजन होंगे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दिन की थीम होगी – “स्वास्थ्य और विरासत”, जिसमें आयुर्वेद और परंपरा का महत्व बताया जाएगा।
मेले का पांचवा दिन – सम्मान और समापन
21 सितंबर को विश्वकर्मा सम्मान समारोह होगा। वरिष्ठ कारीगरों, इंजीनियरों और उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा। छात्रवृत्ति और पुरस्कार वितरित होंगे। इसके बाद सामूहिक भंडारा होगा। समापन समारोह में लोकनृत्य, संगीत और आतिशबाज़ी होगी। इस दिन की थीम होगी – “विरासत और भविष्य”, जो विश्वकर्मा समुदाय को सशक्त बनाएगी।
निष्कर्ष
विश्वकर्मा पूजा 2025 और दिल्ली मेला परंपरा और आधुनिकता का संगम है। यह पर्व श्रम और कौशल का सम्मान सिखाता है। साथ ही समाज में एकता, नवाचार और संस्कृति को आगे बढ़ाता है। चाहे घर हो, ऑफिस या फैक्ट्री – इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर हम अपने कार्य, औज़ार और जीवन में समृद्धि की कामना कर सकते हैं।
Vishwakarma Puja 2025 – FAQs
Q1. विश्वकर्मा पूजा 2025 कब है?
Ans: विश्वकर्मा पूजा 2025 बुधवार, 17 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। यह दिन कन्या संक्रांति पर आता है और खासतौर पर कारीगरों, इंजीनियरों और मशीनों से जुड़े लोगों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
Q2. विश्वकर्मा जयंती का महत्व क्या है?
Ans: विश्वकर्मा जयंती भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। वे सृष्टि के प्रथम इंजीनियर और शिल्पकार माने जाते हैं। यह दिन श्रम की गरिमा, कौशल और नवाचार को सम्मान देने का अवसर है।
Q3. विश्वकर्मा पूजा कैसे की जाती है?
Ans: इस दिन सबसे पहले औज़ारों और मशीनों की सफाई होती है। फिर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर दीपक, फूल, नारियल और मिठाई से पूजा की जाती है। इस दिन औज़ारों का उपयोग न करने की परंपरा है।
Q4. दिल्ली का विश्वकर्मा मेला 2025 कब और कहाँ होगा?
Ans: श्री विश्वकर्मा मेला दिल्ली 2025 17 से 21 सितंबर 2025 तक आयोजित होगा। इसमें पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिल्प प्रदर्शनी, तकनीकी नवाचार और सम्मान समारोह होंगे। यह मेला हजारों श्रद्धालुओं और कारीगरों को आकर्षित करेगा।
Q5. घर और ऑफिस में विश्वकर्मा पूजा कैसे करें?
Ans: अगर आपके पास फैक्ट्री या वर्कशॉप नहीं है, तो भी आप पूजा कर सकते हैं। भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर पर फूल और दीपक चढ़ाएं। अपने लैपटॉप, कैमरा या औज़ारों पर हल्दी-कुमकुम लगाएं और आरती करें। इस दिन औज़ारों का प्रयोग न करें।
यह भी पढ़े…
Kia Carens Clavis और Clavis EV की धमाकेदार डिमांड: 120 दिन में 21,000 बुकिंग्स, जानें पूरी डिटेल
ChatGPT 5: Expert-Level AI, But a Small Mistake Shows the Truth