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Krishna Janmashtami Ratri Puja 2025: भजन-कीर्तन, 56 भोग और चुपवा धाम का महत्व

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Krishna Janmashtami Ratri Puja 2025: जानें कृष्ण जन्माष्टमी 2025 की रात्रि पूजा की खास बातें – भजन-कीर्तन, 56 भोग, प्रसाद और देवरिया ज़िले के चुपवा धाम में हुए भव्य आयोजन की पूरी जानकारी।

Krishna Janmashtami Ratri Puja 2025
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 पर पूरे दिन भक्तों ने भजन-कीर्तन में भाग लिया। मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति गूंजती रही। रात्रि समय विशेष पूजा की तैयारी हुई, जिसमें भक्तों ने उपवास रखते हुए भगवान की आराधना की। हर कोई इस शुभ क्षण का इंतजार कर रहा था, जब नंदलाल का दिव्य जन्म होगा।

रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। मंदिरों की घंटियों और शंखध्वनि से वातावरण पवित्र हो उठा। भगवान को झूले पर विराजित किया गया और विशेष आरती संपन्न हुई। इसी दौरान भक्तों ने अपने उपवास को पूरा कर प्रसाद ग्रहण किया। माहौल में भक्ति और आनंद का अनोखा संगम देखने को मिला।

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इस अवसर पर 56 भोग का आयोजन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के व्यंजन अर्पित किए गए। दूध, दही, मक्खन से लेकर तरह-तरह की मिठाइयों तक हर पकवान से भोग सजाया गया। भक्तों का मानना है कि 56 भोग श्रीकृष्ण की प्रिय परंपरा है, जिससे उनकी कृपा सब पर बनी रहती है।

कृष्ण जन्म की यह पूजा भारत के हर धाम में विशेष रूप से की गई। खासकर उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के चुपवा गाँव में स्थित कृष्ण धाम में भव्य आयोजन हुआ। यहाँ दूर-दराज़ से सैकड़ों श्रद्धालु पहुँचे और रात 12 बजे तक भगवान के जन्मोत्सव का हिस्सा बने। इस धाम का महत्व हर साल बढ़ता जा रहा है।

Krishna Janmashtami Ratri Puja 2025

चुपवा धाम में हुई रात्रि पूजा का दृश्य अद्भुत रहा। भजन मंडलियों ने पूरी रात भक्ति रस से भरे गीत गाए। महिलाओं और बच्चों ने झाँकी सजाई। मध्यरात्रि को जैसे ही जन्म आरती हुई, पूरे गाँव में दिव्य ऊर्जा छा गई। भक्तों ने बड़े प्रेम से प्रसाद ग्रहण किया और मनोकामना मांगी।

चुपवा धाम की एक और विशेषता यह रही कि यहाँ हर साल ग्रामीण और शहरी भक्त मिलकर जन्माष्टमी को सामूहिक रूप से मनाते हैं। इस बार भी गाँव के हर घर से लोग फूल, फल और मिठाई लेकर आए। महिलाओं ने सजावट में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बच्चों ने राधा-कृष्ण की झाँकियाँ प्रस्तुत कीं।

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कहा जाता है कि जन्माष्टमी की रात्रि में जो भी भक्त सच्चे मन से उपवास कर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। इसी आस्था के कारण लोग रातभर जागरण कर “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” जैसे भजनों में डूबे रहे। यह अवसर सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गया।

Lord Krishna in basket with Vasudeva

निष्कर्ष:

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 की रात्रि पूजा पूरे देश में आस्था और उल्लास से भरी रही। दिनभर भजन-कीर्तन, रात्रि 12 बजे आरती और 56 भोग के आयोजन ने इस पर्व को और खास बना दिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के चुपवा धाम में हुआ भव्य आयोजन भक्तों के लिए अद्भुत अनुभव रहा। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि लोगों को भक्ति और सामाजिक एकता से भी जोड़ता है।

FAQs: Krishna Janmashtami Ratri Puja 2025

Q1. कृष्ण जन्माष्टमी पर 56 भोग क्यों चढ़ाए जाते हैं?
कृष्ण जन्माष्टमी पर 56 भोग चढ़ाने की परंपरा बहुत प्राचीन है। मान्यता है कि जब गोवर्धन पर्वत उठाते समय भगवान श्रीकृष्ण ने 7 दिन तक अन्न ग्रहण नहीं किया, तब भक्तों ने उनके लिए 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए। तभी से यह परंपरा हर जन्माष्टमी पर निभाई जाती है।

Q2. कृष्ण जन्माष्टमी पर उपवास का क्या महत्व है?
कृष्ण जन्माष्टमी पर उपवास रखने से शरीर और मन दोनों शुद्ध माने जाते हैं। भक्त दिनभर फलाहार करते हैं और रात 12 बजे जन्म आरती के बाद प्रसाद ग्रहण कर उपवास तोड़ते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

Q3. चुपवा धाम (देवरिया) की विशेषता क्या है?
उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले में स्थित चुपवा धाम कृष्ण भक्तों के लिए खास स्थान रखता है। यहाँ हर साल जन्माष्टमी पर हजारों श्रद्धालु दूर-दराज़ से आते हैं। रातभर भजन-कीर्तन, झाँकियाँ और 56 भोग का आयोजन होता है। रात्रि 12 बजे की आरती का दृश्य अत्यंत दिव्य और अद्भुत होता है।

Q4. कृष्ण जन्माष्टमी पर रात्रि 12 बजे पूजा क्यों की जाती है?
श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे हुआ था। इसलिए इस दिन मध्यरात्रि को विशेष पूजा, झूला सजाना और आरती करना अनिवार्य माना जाता है। यही वह समय है जब भक्त श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं।

Q5. कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रसाद में क्या बाँटा जाता है?
जन्माष्टमी के दिन चढ़ाए गए 56 भोग को बाद में प्रसाद के रूप में भक्तों में बाँटा जाता है। इसमें माखन-मिश्री, लड्डू, खीर, पूड़ी, फल और अन्य मिठाइयाँ शामिल होती हैं। प्रसाद ग्रहण करने से आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

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Pawan Kushwaha

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