अनंत चतुर्दशी 2025 शुक्रवार, 6 सितंबर को है। यह पवित्र त्योहार है जब भक्त भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करते हैं और अनंत सूत्र बांधते हैं। इसे सुख, समृद्धि और रक्षा के लिए किया जाता है। इस दिन गणेश विसर्जन भी होता है, जिससे त्योहार और विशेष बन जाता है। जानें पूजा मुहूर्त, विधि, महत्व और कथा।
अनंत चतुर्दशी 2025 कब है?
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाती है। 2025 में यह त्योहार शुक्रवार, 6 सितंबर 2025 को पड़ रहा है। इसी दिन गणेश विसर्जन भी होता है। देशभर में भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और गणेश जी को भव्य विधि से विदा करते हैं।
यह भी पढ़े…
Oppo F31 और Oppo F31 Pro सितंबर में होगी लॉन्च, मिलेगी 7000mAh बैटरी और दमदार चार्जिंग
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, चतुर्दशी तिथि में व्रत करने के लिए कम से कम दो मुहूर्त बाद सूर्योदय उपयुक्त हैं। सबसे अच्छा समय सुबह के पहले भाग में पूजा करना है। यदि यह समय छूट जाए तो मध्याह्न के आरंभ में भी पूजा कर सकते हैं। इस समय पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
शास्त्रीय नियम
इस व्रत के दौरान भक्तों को सुबह स्नान करना चाहिए और संकल्प लेकर पूजा शुरू करनी चाहिए। पुरुष दाहिनी कलाई पर और महिलाएं बायीं कलाई पर अनंत सूत्र बांधती हैं। पूजा के बाद भोजन ब्राह्मणों को अर्पित किया जाता है और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
गणेश विसर्जन 2025
अनंत चतुर्दशी के दिन ही गणेश विसर्जन होता है, जो इस पर्व को और खास बनाता है। दस दिन की पूजा और आराधना के बाद भक्त भावपूर्ण विदाई देते हैं। डोल-नगाड़ों और शोभायात्रा के साथ गणपति को जल में विसर्जित किया जाता है। इसे सुख, समृद्धि और जीवन में शुभता का प्रतीक माना जाता है।
यह भी पढ़े…
Anant Chaturdashi 2025: Date, Puja Muhurat, Rituals, Significance, Katha and Vrat Vidhi
अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा विधि
व्रत की शुरुआत कलश स्थापना और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र पूजा से होती है। अनंत सूत्र, जिसमें चौदह गांठें होती हैं, हल्दी, केसर और कुंकुम से रंगा जाता है। मंत्र जाप और प्रार्थना के बाद इसे कलाई में बांधते हैं। यह पूजा सुख, समृद्धि और सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए की जाती है।
अनंत चतुर्दशी का महत्व
अनंत चतुर्दशी का महत्व इसलिए है क्योंकि भगवान विष्णु ने चौदह लोकों का सृजन और संरक्षण किया। इसी कारण अनंत सूत्र में चौदह गांठें होती हैं। भक्त मानते हैं कि इस व्रत, विष्णु सहस्रनाम और अनंत विष्णु की पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख, समृद्धि मिलती है।
अनंत चतुर्दशी कथा
महाभारत के अनुसार, जब पांडवों ने सारे राज्य खो दिए, तब श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी व्रत करने की सलाह दी। युधिष्ठिर ने व्रत किया और जल्द ही उनका राज्य हास्तिनापुर लौट आया। तब से यह व्रत कठिनाइयों को दूर करने और सफलता प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है।
निष्कर्ष
अनंत चतुर्दशी 2025 भक्तों के लिए पूजा, अनंत सूत्र और गणेश विसर्जन का विशेष दिन है। इसे श्रद्धा से करने से सभी परेशानियां दूर होती हैं, सुख-समृद्धि मिलती है और इच्छाएं पूरी होती हैं। यह त्योहार भगवान विष्णु की अनंत कृपा का प्रतीक है।
FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
Ans: भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा और गणेश विसर्जन के लिए।
Q2. अनंत सूत्र की 14 गांठों का महत्व क्या है?
Ans: 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा रक्षित चौदह लोकों का प्रतीक हैं।
Q3. अनंत चतुर्दशी 2025 कब है?
Ans: शुक्रवार, 6 सितंबर 2025।
Q4. अनंत चतुर्दशी पूजा कैसे होती है?
Ans: कलश स्थापना, भगवान विष्णु की पूजा, 14 गांठों वाला सूत्र बांधना और मंत्र जाप।
Q5. अनंत चतुर्दशी की कथा क्या है?
Ans: महाभारत में पांडवों को व्रत करने की सलाह मिली और उन्होंने राज्य व खुशहाली वापस पाई।
यह भी पढ़े…
Kia Carens Clavis और Clavis EV की धमाकेदार डिमांड: 120 दिन में 21,000 बुकिंग्स, जानें पूरी डिटेल
ChatGPT 5: Expert-Level AI, But a Small Mistake Shows the Truth